क्या लिखूँ?
लिख के करूँ क्या?
क्यूँ लिखूँ?
फिर लिख भी दूँ क्या?
रण को परिभाषित करूँ?
या करूँ विचरण हृदय की वर्जनाओं में?
वासना के मूल का वो गूढ़ प्रतिपादित करूँ?
रंजना, अतिरंजना या कल्पना?
किसके काँधे सर रखूं?
किस विषय का पत्र पर विलयन करूँ?
मै करूँ क्या?
अब लिखूँ?
तो क्या लिखूँ?
लिख के करूँ क्या?
क्यूँ लिखूँ?
फिर लिख भी दूँ क्या?
रण को परिभाषित करूँ?
या करूँ विचरण हृदय की वर्जनाओं में?
वासना के मूल का वो गूढ़ प्रतिपादित करूँ?
रंजना, अतिरंजना या कल्पना?
किसके काँधे सर रखूं?
किस विषय का पत्र पर विलयन करूँ?
मै करूँ क्या?
अब लिखूँ?
तो क्या लिखूँ?